ऐसा फास्ट बॉलर कोई और नहीं होगा , लोकतंत्र की रक्षा के लिए दे दी कुर्बानी

क्रिकेट की अपार लोकप्रियता किसी कामयाब खिलाड़ी को देश और दुनिया में सेलेब्रिटी बना देती है। उसकी हर गतिविधि पर लोगों की नजर रहती है। वह कोई सामाजिक कार्यकर्ता नहीं होता। लेकिन अगर लोकहित में वह कोई राजनीतिक विरोध करता है तो पूरी दुनिया में उसकी गूंज होने लगती है। 1998 के आसपास जिम्बाब्वे के हेनरी ओलंगा को दुनिया के प्रमुख तेज गेंदबाजों में गिना जाता था।


उन्होंने अपनी फास्ट बॉलिंग से जिम्बाब्वे को कई मैच जिताये थे। वे अपने देश के पोस्टर ब्वॉय थे। लेकिन जल्द ही स्थिति बदल गई।उस समय उनके देश जिम्बाब्वे में रॉबर्ट मुगावे का शासन था। उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ आजादी की लड़ाई लड़ी थी। काले समुदाय के हितों की रक्षा के नाम पर वे सत्ता (1980) में आये थे।

लेकिन धीरे धीरे मुगाबे निरंकुश होते गये। सत्ता में बने रहने के लिए चुनावी धांधली के आरोप लगे। उन पर एक और गंभीर आरोप था। उन्होंने सेना की एक ऐसी ब्रिगेड बना रखी थी जिसका काम उनके राजनीतिक विरोधियों को खत्म करना था। कहा जाता है कि इस ब्रिगेड ने करीब 20 हजार लोगों को मारा था।

हेनरी ओलंगा देश की इस राजनीतिक व्यवस्था से नाखुश थे। उन्होंने लोकतंत्र की रक्षा करने के लिए रॉबर्ट मुगाबे के विरोध का फैसला किया। वे काले समुदाय से थे फिर भी उन्होंने मुगाबे की दमनकारी राजनीति का समर्थन नहीं किया। विरोध के लिए उन्होंने एक बहुत बड़े अंतर्राष्ट्रीय मंच को चुना था। ये मौका था विश्वकप क्रिकेट में जिम्बाब्वे बनाम नामीबिया का मैच।

341 के टारगेट का पीछा करने के लिए नामिबिया की पारी शुरू हुई। लेकिन जब जिम्बाब्वे की टीम फील्डिंग के लिए मैदान पर आयी तब दर्शक हेनरी ओलंगा को देख कर चौंक गये। उन्होंने ने भी अपनी बांह पर काली पट्टी बांध रखी थी। लोग सोचने लगे टीम कि 11 खिलाड़ियों में सिर्फ दो ने ही क्यों काली पट्टी बांध रखी है? क्या इसका कोई खास मतलब है? नामिबिया ने 25.1 ओवर में पांच विकेट पर 104 रन बनाये थे कि बारिश आ गयी। तब डकवर्थ लुईस नियम के मुताबिक जिम्बाब्वे को 86 रनों से विजयी घोषित कर दिया।

मैच के बाद ओलंगा और एंडी ने एक वक्तव्य जारी कर अपनी बांह पर काली पट्टी बांधने की वजह बतायी। दरअसल हेनरी ओलंगा और एंडी फ्लावर ने जिम्बाब्वे में लोकतंत्र की हत्या के विरोध में अपनी बांह पर काली पट्टी बांधी थी। उन्होंने रॉबर्ट मुगाबे के निरंकुश और दमनकारी शासन के विरोध के लिए यह शांतिपूर्ण तरीका अपनाया। उन्होंने कहा था, हमारी यह छोटी सी कोशिश शायद हमरा प्यारे देश जिम्बाब्वे में मानवाधिकार हनन को रोकने में सहायक हो सके।

मुगाबे सरकार एंडी फ्लावर से अधिक ओलंगा से बहुत नाराज थी। एंडी गोरे थे लेकिन ओलंगा काले समुदाय से थे। उनके विरोध से देश के बहुसंख्यक काले समुदाय पर असर पड़ सकता था। इसलिए ओलंगा को दंडित करने की कार्रवाई शुरू हो गयी। खराब फऑरम का हवाला देकर उन्हें अगले छह मैचों के लिए टीम से बाहर कर दिया गया।

बाद में उन पर देशद्रोह का आरोप लगाया गया और गिरफ्तारी का वारंट भी जारी कर दिया गया। उन्हें जान से मारने की धमकियां मिलने लगीं। लेकिन विश्वकप आयोजन के दौरान रॉबर्ट मुगाबे ओलंगा पर कार्रवाई करने से परहेज कर थे क्यों कि इससे दुनिया भर में उनकी छवि और धूमिल हो जाती।

15 मार्च को जिम्बाब्वे को श्रीलंका के साथ सुपर-8 में आखिरी मैच खेलना था। दक्षिण अफ्रीका के शहर ईस्ट लंदन में ये मैच था। जिम्बाब्वे की टीम दक्षिण अफ्रीका में थी। इस मैच में एडी फ्लावर तो खेल रहे थे लेकिन ओलंगा टीम से बाहर थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published.