80 साल बाद चौथी पीढ़ी में जन्मी बेटी, पूरा गांव जमकर नाचा, नवजात को गाजे-बाजे से लाए घर और…

बेटी के जन्म की खुशी क्या होती है? कोई इस परिवार को देखकर अंदाजा सहज लगा सकता है। परिवार में 80 साल बाद नन्ही परी की किलकारी गूंजी तो शानदार जश्न मनाया गया। खुशियों में पूरे गांव ने शिरकत की। हर कोई जमकर नाचा और बच्ची को गाजे-बाजे के साथ अस्पताल से घर लेकर आए।

80 साल बाद बेटी का जन्म हुआ
बेटी के जन्म पर उत्सव मनाने का यह मामला मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले के नागर गांवड़ा का है। मीडिया से बातचीत में कुंदन बैरवा ने बताया कि उनके परिवार में 80 साल बाद बेटी का जन्म हुआ है।

खुद कुंदन के दो बेटे हैं
कुंदन के छोटे भाई की पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर उसे अस्पताल ले गए। जहां उसने बेटी को जन्म दिया है। कुंदन के पिता के भी बेटी नहीं है। खुद कुंदन के दो बेटे हैं। अब भाई के घर बेटी जन्मी तो पूरा परिवार खुशी से झूम उठा।

खुद कुंदन के दो बेटे हैं
कुंदन के छोटे भाई की पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर उसे अस्पताल ले गए। जहां उसने बेटी को जन्म दिया है। कुंदन के पिता के भी बेटी नहीं है। खुद कुंदन के दो बेटे हैं। अब भाई के घर बेटी जन्मी तो पूरा परिवार खुशी से झूम उठा।

बेटियां भी बेटों से कम नहीं हैं
कुंदन कहते हैं कि बहुत सारे परिवार ऐसे भी हैं, जो बेटी के पैदा होने पर मायूस हो जाते हैं। जबकि बेटियां भी बेटों से कम नहीं हैं। हम उसकी अच्छी पर​वरिश करें और उन्हें अच्छे संस्कार के साथ-साथ पढ़ने-लिखने को भरपूर अवसर दें तो वे भी नाम रोशन कर सकती हैं।

नवजात बच्ची की आरती उतारी गई
जब प्रसूता नवजात बेटी को लेकर पहली बार घर पहुंची तो घर को सजाया गया। डीजे बजाया गया और मां-बेटी का फूल मालाओं से स्वागत किया गया। नवजात बच्ची की आरती उतारी गई।

नन्ही परी के रूप में उनके घर साक्षात लक्ष्मी आई
उसके पैरों पर रोली लगाकर सफेद कपड़े पर निशान लिए गए और उस कपड़े को सहेज कर रखा गया। बेटी जन्म पर कुंदन बैरवा के परिवार का कोना-कोना खुशियों से सराबोर नजर आया। परिजनों ने कहा कि नन्ही परी के रूप में उनके घर साक्षात लक्ष्मी आई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published.