7000 साल पुरानी इंडोनेशियाई महिला की ममी ने वैज्ञानिकों को चकराया, साइबेरिया से संबंध के मिले सबूत

इंडोनेशिया में 7 हजार साल पुरानी महिला के शरीर ने इंसानी इतिहास को लेकर कई अकल्पनीय राज से पर्दा हटाना शुरू कर दिया है।महिला के शरीर से जो आनुवंशिक निशान मिले हैं,वो इंडोनेशिया में काफी शुरूआती समय में रहने वाले इंसानों और साइबेरिया में रहने वाले इंसानों के बीच के मिश्रण का खुलासा किया है

जिसके बाद रिसर्च में शामिल वैज्ञानिक हैरान हो गये हैं.रिसर्चर्स समझ नहीं पा रहे हैं कि इंडोनेशिया की महिला का साइबेरिया से कैसे संपर्क हुआ होगा.

साइबेरिया से मिश्रण के सबूत मिले
7 हजार साल पुरानी महिला की बॉडी मिलने के बाद वैज्ञानिक इंसानों के शुरूआती इतिहास का पता लगाने की कोशिश कर रहे थे और आनुवंशिक जांच में पता चला कि, इंडोनेशिया में शुरुआती मनुष्यों और हजारों किलोमीटर दूर रहने वाले साइबेरिया के लोगों के बीच मिश्रण वैज्ञानिकों के अनुमान से काफी पहले ही हो गया था।

अगस्त में वैज्ञानिक पत्रिका नेचर में प्रकाशित रिसर्च पेपर में एशिया में प्रारंभिक मानव प्रवास के सिद्धांतों को डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड (डीएनए), आनुवंशिक फिंगरप्रिंट के विश्लेषण के बाद पहले की थ्योरी बदल चुकी है। महिला के शरीर को धार्मिक अनुष्ठान के बाद एक इंडोनेशियाई गुफा में एक अनुष्ठान दफन कर दिया गया था।

कैसे हुआ दो मानव प्रजातियों का मिलन?
इंडोनेशिया की 7 हजार साल पुरानी महिला के शरीर का डीएनए टेस्ट के नतीजे चौंकाने वाले हैं। ऑस्ट्रेलिया के ग्रिफिथ विश्वविद्यालय के एक पुरातत्वविद बसरान बुरहान ने कहा कि, “इस बात की संभावना है कि वालेसिया क्षेत्र में शुरुआती समये में दो होमो सेपियन्स प्रजाति का मिलन हुआ होगा और फिर डेनिसोवन्स (उप-प्रजाति) का निर्माण हुआ होगा।”

वैज्ञानिक बुरहान इस रिसर्च में भाग लेने वाले वैज्ञानिकों में से एक हैं। आपको बता दें कि, महिला का बॉडी इंडोनेशिया के सुलावेसी में चट्टानों के बीच काफी सुरक्षित अवस्था में पाया गया था। महिला के शरीर को हाथों से काफी सुरक्षित तरीके से धार्मिक रिवाजों के साथ चट्टानों के बीच लींग पन्नीज गुफा में हाथों से दफनाया गया था।

कौन थे डेनिसोवन्स ? डेनिसोवन्स प्राचीन मनुष्यों का एक समूह था, जिसका नाम साइबेरिया की एक गुफा के नाम पर रखा गया था जहां उनके अवशेषों की पहली बार 2010 में पहचान की गई थी और वैज्ञानिक उनके बारे में बहुत कम समझते हैं, यहां तक कि उनकी उपस्थिति का विवरण भी वैज्ञानिकों को काफी कम पता है।

इंडोनेशिया में इस महिला के बॉडी को वैज्ञानिकों ने ‘बेसे’ नाम दिया था, जिसका मतलब इंडोनेशिया की बुगिस भाषा में ‘नवजात बच्ची’ होता है। इस महिला का बॉडी उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में पाए जाने वाले कुछ काफी अच्छी तरह से संरक्षित नमूनों में से एक है।

वैज्ञानिकों ने कहा कि, इससे पता चलता है कि वह ऑस्ट्रोनेशियन लोगों से दक्षिण पूर्व एशिया और ओशिनिया में आई होगी, जो काफी सामान्य है, लेकिन डेनिसोवन (उप-प्रजाति) के एक छोटे हिस्से को वो अपने साथ लेकर आई होगी।

प्रारंभिक मानव सिद्धांत ही बदला
तमाम रिसर्च के बाद हाल ही में दुनियाभर के वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे थे कि महज 3500 साल पहले ही उत्तरी एशिया के लोग, जिन्हें डेनिसोवन कहा जाता है, वो दक्षिण-पूर्वी एशिया की तरफ गये होंगे, लेकिन ‘बेसे’ के डीएनए ने प्रारंभिक मानव प्रवासन के पैटर्न के सिद्धांतों को बदल दिया।

यह खोज पापुंस और स्वदेशी ऑस्ट्रेलियाई लोगों की उत्पत्ति के बारे में भी कई महत्वपूर्ण जानकारी हासिल करने में मदद कर सकती है, जो डेनिसोवन डीएनए साझा करते हैं। वहीं, दक्षिण सुलावेसी में हसनुद्दीन विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर इवान सुमंत्रि ने कहा कि, “शुरूआती इंसानों के माइग्रेशन को लेकर जो भी सिद्धांत हैं, वो बदलेंगे ही, क्योंकि नस्ल को लेकर जो सिद्धांत हैं, वो भी बदल रहे हैं”।

उन्होंने कहा कि बेसे के अवशेष ऑस्ट्रोनेशियनों के बीच डेनिसोवन्स का पहला संकेत प्रदान करते हैं, जो इंडोनेशिया के सबसे पुराने जातीय समूह हैं। उन्होंने कहा कि, “अब कल्पना करने की कोशिश करें कि, उन्होंने इंडोनेशिया तक पहुंचने के लिए अपने जीन को कैसे फैलाया और बांटा होगा”।

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